हर रोज किताब का पन्ना पलट कर सोचती हों ,
काश ऐसे ही पलट जाएँ हमारी जिन्दगी!
खयालो में जो मिलते हें रोज,
अचानक सामने आ जाएँ तो क्या बात हें!
हर शख्स अपनी बारे में सोचता हें हर रोज,
दोस्तों कें बारे में सोचे तो क्या बात हें!
माँ बाप जीतें हें हमारे लियें हर रोज,
हम उन कें लियें जियें तो क्या बात हें!
हम तो सबको चाहतें हें सबको हर रोज,
कोई हमें दिल सें चाहें तो क्या बात हें!!
@@daisy aggarwal@@
Saturday, July 25, 2009
Thursday, July 23, 2009
tammanaa!!
चाँद को पाना चाहा,
तो क्या बुरा चाहा,
क्या गुनाह किया,
जो सबने इल्जाम दिया,
वो माना किसी और का था,
मगर हमने तमना की तो क्या गुनाह कीया,
जो दिल को भाया उसे प्यार कीया ,
तो दुनिया नें रुसवा कीया,
चाँद तो सबका हें येही सोचा कीया,
आज भी वही हें जहाँ सें शुरू कियां!!
@@daisy aggarwal@@
तो क्या बुरा चाहा,
क्या गुनाह किया,
जो सबने इल्जाम दिया,
वो माना किसी और का था,
मगर हमने तमना की तो क्या गुनाह कीया,
जो दिल को भाया उसे प्यार कीया ,
तो दुनिया नें रुसवा कीया,
चाँद तो सबका हें येही सोचा कीया,
आज भी वही हें जहाँ सें शुरू कियां!!
@@daisy aggarwal@@
Wednesday, July 15, 2009
dosti ki dastan!!!!
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